एक थी काँच की हवालेी - 6

Discussion in 'Hindi sex stories - हिंदी सेक्स कहानियां' started by RareDesi, May 16, 2016.

  1. RareDesi

    RareDesi Guest

    This story is part 6 of 6 in the series

    एक थी काँच की हवालेी - 6
    रवि पिच्छले 30 मिनिट से अपने रूम में बैठा उस नौकर की प्रातीक्षा कर रहा था जिसे उसने अपने कपड़े इस्त्री करने के लिए दिया था. सड़क के हादसे में उसके कपड़ों की इस्त्री खराब हो गयी थी. अभी तक वो उनही कपड़ों में था जो हवालेी में घुसते वक़्त पहन रखा था. वो कुर्सी पर बैठा उल्लुओ की तरह दरवाज़े की तरफ टकटकी लगाए घुरे जा रहा था.

    *****

    ""थक्क..थक्क.!"" अचानक दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी. निक्की उठी और दरवाज़ा तक पहुँची. दरवाज़ा खुलते ही सामने एक खूबसूरात सी लड़की सलवार कमीज़ पहने खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी. उसे देखते ही हिक्की के आँखों में चमक उभरी. वो कंचन थी. निक्की ने उसका हाथ पकड़ा और रूम के भीतर खींच लिया. फिर कासके उससे लिपट गयी. दोनो का आलिंगन इतना गहरा था की दोनो की चुचियाँ आपस में दब गये. निक्की इस वक़्त ब्लू जीन्स और ग्रीन टी-शर्ट में थी. कंचन ने उसे देखा तो देखती ही रही गयी. - ""निक्की तुम कितनी बदल गयी हो. इन कपड़ों में तो तुम बहुत खूबसूरात लग रही हो.""

    ""मेरी जान.तू चिंता क्यों कराती है. मैं तुम्हारे लिए भी ऐसे ही काई ड्रेसस लाई हूँ. उन कपड़ों को पहनते ही तुम भी मेरी तरह हॉट लगने लगोगी."" निक्की उसे पलंग पर बिठाती हुई बोली.

    ""मैं और ऐसे कपड़े? ना बाबा ना..! मैं ऐसे कपड़े नही पहन सकती."" कंचन घबराकर बोली - ""इन कपड़ों को पहन कर तो मैं पूरे गाँव में बदनाम हो जाउंगी. और हो सके तो तू भी जब तक यहाँ है ऐसे कपड़े पहनना छोड दे.""

    ""कोई कुच्छ नही बोलेगा, तू पहनकर तो देख. और तू मेरी चिंता छोड.मैं तो अब हमेशा यहीं रहूंगी और ऐसे ही कपड़े पहनुँगी."" निक्की चहकति हुई बोली.

    ""ना तो तू सदा यहाँ रही पाएगी और ना ही हमेशा ऐसे कपड़े पहन सकेगी."" कंचन मुस्कुरकर बोली - ""मेरी बन्नो आख़िर तू एक लड़की है, एक दिन तुम्हे व्यः करके अपने साजन के घर जाना ही होगा. और तब तुम्हे उसके पसंद के कपड़े पहनने पड़ेंगे.""

    कंचन की बात सुनकर अचानक ही निक्की के आगे रवि का चेहरा घूम गया. वो बोली - ""तुम्हे पता है आज राटसे में आते समय एक दिलचस्प हादसा हो गया.?""

    ""हादसा? कैसा हादसा?"" कंचन के मूह से घबराहट भरे स्वर निकले.

    ""स्टेशन पर एक बेवकूफ़ मिल गया. उसके पास एक ख़तरा बाएक थी. उसने मुझे पूरे 20 मिनिट अपने ख़तरा बाएक की आवाज़ से परेशन किया."" वो मुस्कुराइ.

    ""फिर.?"" कंचन उत्सुकता से बोली.




    ""फिर क्या.! मैने भी उसे उसकी औकात बता दी. और अब वो बेवकूफ़ हमारे घर का मेहमान बना बैठा है. पापा कहते हैं वो डॉक्टर है. लेकिन मुझे तो वो पार्ले दर्जे का अनाड़ी लगता है."" निक्की मूह टेढ़ा करके बोली.

    ""अभी कहाँ है?."" कंचन ने पूछा.

    ""होगा अपने कमरे में. चलो उसे मज़ा चखाते हैं. वो अपने आप को बड़ा होशियार समझता है."" निक्की उसका हाथ पकड़ कर खींचती हुई बोली.

    ""नही..नही.निक्की, ठाकुर चाचा बुरा मन जाएँगे."" कंचन अपना हाथ च्छूदती हुई बोली. लेकिन निक्की उसे खींचती हुई दरवाज़े से बाहर ले आई.

    गॅलरी में आते ही उन्हे मंगलू घर का नौकर सीढ़ियाँ चढ़ता दिखाई दिया. उसके हाथ में रवि के वो कपड़े थे जो उसने इस्त्री करने दिया था. वो सीढ़ियाँ चढ़कर बाईं और मूड गया. उसके कदम रवि के कमरे की तरफ था.

    ""आए सुनो.!"" निक्की ने उसे पुकारा.

    नौकर रुका और पलटकर निक्की के करीब आया. ""जी छोटी मालकिन?""

    ""ये कपड़े किसके हैं?""

    ""डॉक्टर बाबू के..उन्होने इस्त्री करने को दिया था. अब उन्हे देने जा रहा हूँ."" नौकर तोते की तरह एक ही साँस में सब बोल गया.

    ""इन कपड़ों को लेकर अंदर आ."" निक्की ने उसे उंगली से इशारा किया.

    नौकर ना समझने वाले अंदाज़ में निक्की को देखा फिर आनमने भाव से अंदर दाखिल हुआ.

    ""नाम क्या है तुम्हारा?"" निक्की ने नौकर से पूछा.

    ""मंगलू.!"" नौकर ने अपने दाँत दिखाए.

    ""मूह बंद कर.."" निक्की ने डपता -""ये कपड़े यहाँ रख और जाकर इस्त्री ले आ.""

    ""लेकिन इस्त्री तो हो चुकी है छोटी मालकिन?"" नौकर ने अपना सर खुज़ाया.

    ""मैं जानती हूँ. तुम्हे एक बार फिर से इस्त्री करनी होगी. हमारे स्टाइल में."" निक्की के होंठो में रहस्यमई मुस्कुराहट नाच उठी - ""तुम जाकर इस्त्री ले आओ. और अबकी कोई सवाल पूछा ना तो पापा से बोलकर तुम्हारी छुट्टी करवा दूँगी. समझे?""

    ""जी.छोटी मालिकन."" नौकर सहमा - ""सब समझ गया. मैं अभी इस्त्री लाता हूँ."" वो बोला और तेज़ी से रूम के बाहर निकल गया.

    ""तू करना क्या चाहती है?"" कंचन हैरान होकर बोली.

    एक थी काँच की हवालेी - 6

    एक थी काँच की हवालेी - Hindi thriller stories


     

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