फाइनल डेस्टिनेशन (हिन्दी अडल्ट वेर्जन) - 48

Discussion in 'Hindi sex stories - हिंदी सेक्स कहानियां' started by RareDesi, May 16, 2016.

  1. RareDesi

    RareDesi Guest

    This story is part 48 of 48 in the series

    मतलब की पहले भी हुआ वाहा ऐसा... ओह गोद.. इट्स सम्तिंग बिहाइंड इन इट.. मेने फिर चिंता दिखाते हुए कहा..

    निकुल :- आक्चुयल में क्या पता लगा उससे..

    रहूल :- मिलन ने अभी बताया की जिस दिन वो असिदेंट हुआ था 13 को.. उसके ठीक 3 साल पहले उसे हाइवे पे ऐसा ही ज़बरदस्त आक्सिडेंट हुआ था.

    निकुल :- तो.. हाइवेस पे आक्सिडेंट होते रहते हैं..

    हाँ होते रहते हैं.. पर निकुल याद है ना वो कॉलेज वाला आक्सिडेंट जब वो गमला गिरा था वो पहली बार नही था 3 साल पहले भी एक सीनियर स्टूडेंट के उप्पर वो गमला गिरा था और वो सीरियस्ली इंजूर्ड हुआ था.. रहूल ने निकुल को समझते हुए कहा..

    निकुल :- में अभी भी कुछ नही समझा..

    इस कहानी को समझना बहुत मुश्किल है. बालकनी में जाने से पहली एक सीडी बननी हुई थी वाहा बैठते हुए बोला.

    रहूल :- निकुल बहुत सिंपल बात है.. 2018 में जब मेने ये सब देखा तो उसके 3 साल पहले यानी की 2015 में ही वो हादसा हुआ ठीक 3 साल पहले और डेट भी थी 13त सेप्टेंबर.. तुझे कुछ अजीब नही लगता

    निकुल :- हम. पर फिर भी कोई और बात कही उसने..

    रहूल :- हाँ एक बात जो मुझे मिलन ने कही और वो शायद कुछ ऐसी ही जो हर बार बीच में आ जाती है.

    क्या?? मेने रहूल से पूछा

    रहूल :- यही.. की उसे हाइवे पे बढ़ता लिमिट और कुछ रूल्स बनाने के लिए बोला गया था लेकिन वो नही हो पाया. पोलिक्टिकल रीज़न्स के वजह से और दूसरी ये की कॉलेज में उसे जगह गमला रखने पर भी कई बार कंप्लेन हुई .. पर फिर भी वाहा उससे रख दिया जाता. ये बात समझ नही आती की ऐसा क्यूँ हो रहा है की

    जब भी कोई घतना हो रही है उसमे उससे पहले चेतावनी दी जाती थी है. या फिर यूँ कहूँ की इंसान की ग़लती की सज़ा होती है और मौत उससे अपना हथियार बना लेती है. मेने अपने चेहरे के नीचे हाथ रख की ज़मीन को देखते हुई रहूल की बात को समझते हुई कहा.. शायद कुछ कुछ मुझे अब समझ में आ रहा था ये खेल.. या फिर यूँ कहूँ की मौत से लड़ने जा रहा था में...फिर मेने रहूल की तरफ़ देखते हुए कहा

    रहूल तूने सपने में ये भी देखा था की वो पुल को मैनटांसे की ज़रूरात है और अगर ऐसा नही हुआ तो वो गिर भी सकता है.

    रहूल :- हाँ.. ऐसा कुछ देखा था मेनी..

    ह्म्‍म्म्म यानी की ग़लती हमारी ही है.. मौत तो बॅस उसे ग़लती की सज़ा हमे दे रही है. मेने कहा और फिर सोचने लगा. शायद कुछ था जिससे आज में किसी की जान बच्चा पाँव या फिर कुछ और जिससे इस कहानी की गूती को सुलझा पाँव..

    रहूल :- में कुछ समझा नही?

    निकुल :- में तो बिल्कुल नही समझा..

    तुम दोनो बैठू और रहूल अब जो में कनेक्षन्स बनूंगा उससे ध्यान से सुनना और अगर कोई और भी बात याद आई उससे फ़ौरन मुझे बठाना..

    रहूल ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाइ..

    हम तो सबसे पहले शुरू करते हैं अरमान से. रहूल तूने उससे क्लास में ग़लत डेट बातयी थी जो की थी 10 सेपएंबेर 2020.. जबकि वो 2018 चल रहा था.. उसके बाद दीक्षा और अरमान की मदद तूने एक भालू से की उसे रात. उसके बाद अरमान की मौत ठीक उसी दिन हुई जिस दिन की डेट तुमने बताई थी यानी की 10 सेप्टेंबर 2020 और वो भी एक जानवर से.. ये है कनेक्षन उसकी मौत का..

    दूसरी बार्री आई दीक्षा की. जिसने अरमान की हेल्प नही की.. पर उसे रात तुमने उसकी हेल्प की थी. फिर तुम्हारे साथ अजीब से इन्सिडेंट होना.. और वही चीज़ों की वजह से दीक्षा का मारना ये एक बड़ी ही अजीब सी चीज़ है.. उसके बाद दीक्षा का घर ना जाके कब्रिस्ठान वाले रास्ते पे जानना.. यही कारण बना उसकी मौत का. यानी की अगर देखा जाई.. तो सब कहीं ना कहीं से जड हुए हैं किसी वजह सी.. और सबसे मैं बात उसे ट्रेन वाले आक्सिडेंट से रहूल.. हम सब उसी से जुड़े हैं.. ज़रा सोचो अगर उस ट्रेन में होते तो कोई नही बचता.. लेकिन हम उसे ट्रेन से बच गये.. अभी चीट डेत.. और सहयड अब..

    एक एक कर की सब की बार्री है... रहूल ने मेरी बात को आगे बड़ाया..

    निकुल :- नही.. यार..नही ये नही हो सकता.बिल्कुल नही.. ये सब फ़िल्मो में होता है असल ज़िंदगी में नही..

    असल ज़ििंदगी कहीं ना कहीं फ़िल्मो से जुद्डी होती है निकुल..इस वक़्त एमोशनल होने का नही.. बल्कि आगे क्या करना है वो सोचने का है.. रहूल दिमाग़ पे ज़ोर डाल शायद कुछ याद आ जाए तुझी. कुछ ऐसा जो तू भूल रहा हो. क्या पता वो अगली ज़िंदगी से जुड्डा हुआ हू.मेने रहूल की तरफ़ देखते हुए कहा...

    रहूल ने अपनी आँखें इधर उधर घुमणि शुरू कर दी.. वो कुछ सोचने लगा.. कुछ ऐसा जो वो भूल रहा था

    कूई भी बात रहूल.. सोच .. शायद वो किसी की ज़िंदगी को बच्चा ली.. मेने फिर से ज़ोर देते हुए कहा..

    अचनाक हे रहूल खड़ा हो गया..और निकुल को घूर्ने लगा... उसको ऐसा खड़ा देख में और निकुल भी कहदे हो गयी..

    रहूल :- निकुल. के घर. उसे दिन पार्टी में. मेने एक बूढ़ा और बूढ़ी की बहुत बुरी मौत देखी थी.

    ये सुन की मेरे दिमाग़ के पल के लिए सुन हो गया..और शायड निकुल का भी यही हाल था..




    निकुल तूने वो घर कब लिया था... में निकुल के पास गया और उससे घूराते हुई पूछा..

    वो मेरी तरफ़ देखने लगा.उसके चेहरे पे अभी भी था की वो शॉक में है..

    बता निकुल की तूने कब लिया था वो घर.. मेने निकुल को हिलाते हुई कहा..

    निकुल :- वो वो.. कुछ 5 साल पहली.

    यानी की 2015 में ही..मेने थोड़ा गंभीर सेहरा बनाते हुई कहा..

    निकुल :- हाँ...

    किस ब्रोकर से लिया था.. उसका अड्रेस्स है तेरे पास?

    निकुल :- हाँ.. वो ब्रोकर का अड्रेस्स है मेरे पास.. लेकिन क्या हुआ है .. रहूल के उसे सपने से क्या तालूक़ है..

    निकुल अभी के अभी उसे ब्रोकर से पूछ... उससे पूछ की तेरे से पहले कोन रहता था वाहा कहाँ गये वो सब.. सब कुछ जो भी डीटेल है उससे अभी के अभी पूछ . मेने चिंतित टोने में कहा.

    निकुल ने बिना कुछ बोले फोन निकाला..उसके हाथ कांप रहे थे..चेहरे पे पसीना आ चुका था. उसने फोन मिलाया.. लेकिन आउट ऑफ कवरेज एरिया जा रहा था.

    निकुल :- नोट रीचबल है.

    अभी के अभी उसके पास जा... जल्दीीईईईईई.... मेने निकुल को फोर्स देते हुए कहा.वो बिना कुछ बोले निकल गया.

    रहूल मुझे घूर रहा था मानो पूछ रहा हो.. की क्या करा है मेने अभी अभी.

    रहूल :- ऐसा क्या हुआ की तुम्हारे चेहरे पे इतनी चिंता आ गयी.. उसे बूढ़ा बूढ़ी से निकुल का क्या रीलेशन.?

    रीलेशन निकुल से नही. उसे घर से है रहूल..मेने थोड़ी चिंता जताई.

    उसे घर में जो भी उससे बोल अभी के अभी उसे घर से बाहर निकल जाई फ़ौरन... में अब घबराने लगा था क्यूँ की मुझे अंदर से लगने लगा कुछ गड़बड़ है...

    रहूल :- तू सॉफ सॉफ बोल.. की आख़िर क्या हुआ है.. (रहूल ने फोन निकलते हुई कहा)

    अभी तो बस इतना समझ ली की कुछ बहुत बुरा हो सकता है.. हमे कुछ भी कर की इससे रोकना है.. मौत ने अपनी चल चल दी है...मेरे इतना कहते ही रहूल की आँखें फट गयी.. उसने फटाफट से फोन मिलाया.

    घंटी बजने लगी.. घंटी बजने लगी.... पिक उप थे फोन कोमल. प्लीज़..

    बेड पे पड़ा फोन बज रहा था स्करीन पे नाम रहूल का लिखा हुआ था.. पर बेडरूम में कोई नही था..

    शिट्सस. कोई फोन नही उठा रहा... में इशिका को पूचेटा हूँ...फिर रहूल ने इशिका को फोन किया. रिंग्ग गयी..

    हेलो.. हाँ रहूल क्या काम है.. ? इशिका ने ऐसे कहा मानो वो बात नही करना कहती हो..

    रहूल :- इशिका कहाँ हो तुम?

    क्यूँ तुमसे क्या मतलब?

    इशिका कोमल को अभी बोलो की वो घर से बाहर निकल जाई. वो अपना फोन नही उठा रही ... रहूल ने चिंतित टोने में कहा..

    इशिका :- रहूल.. नो. अब तुम मुझसे ये मत कहना की तुमने फिर.

    दो डेठ इशिका. प्लीज़ ताक़ि कोमल आउट ऑफ थे होमे...

    पर में घर पे नही हूँ.. ऑफीस के कम से साउत जाए आई हूँ.. मुझे तो कम से कम 2 घन्टे लग जाएँगे पहचने में... इशिका ने डरी हुई आवाज़ में कहा..

    श शिट्सस.... रहूल ने मेरी तरफ़ देखते हुए कहा..

    क्या हुआ. मेने उसको परेशानी में देख के अपना सवाल किया.

    रहूल ने बस ना में अपनी गर्दन हिलाई.. उधर से फोन में इशिका हेलो हेलू कर रही थी..

    हमे अभी के अभी निकलना पड़ेगा.. लेट नही कर सकते.. कामन लेट्स गो.. मेने रहूल की तरफ़ देखते हुई कहा और रूम में घुस गया फोन और कार की के लेने के लिए..

    रहूल :- इशिका तू पहुच हम जा रहे हैं.

    इशिका :- रहूल क्या हुआ है?

    सम्तिंग विल गॉना वेरी बाद इशिका.. और अभी हॅव तो स्टॉप इट.

    छल्ल रहूल. मेने रहूल को देखते हुई कहा.

    रहूल :- इशिका तू भी पहुच में यहाँ से पहुच रहा हूँ. (फोन कट)

    फिर में और रहूल निकल गाईए.. मेने गद्दी बाहर निकली और तेज़ी से उससे भागने लगा.

    फोन ट्राइ कराता रही. मेने रहूल से कहा.. और वो फोन मिलता रहा. उसे तरफ़ सिर्फ़ फोन की घंटी बज रही थी.. फोन कोई नही उठा रहा था..

    दूसरी तरफ़ निकुल उसे ब्रोकर के पास पहुच चुका था.. और उससे कॅबिन में बैठे बात करर रहा था..

    इशिका भी अपनी अपनी कार लेके उसे जगह से निकल गयी.उसके चेहरे पे डर सॉफ दिख रही था.. उसने गाड़ी क्यों फुल बढ़ता पे रखा और भागती हुई निकुल के घर की तरफ़ भी देने लगी..

    कोमल बाथरूम से फ्रेश हुक बाहर निकली. उसने सर पे टावाल बँधा हुआ था वो अभी अभी नहा कर बाहर आई थी..

    चलते हुई वो किचन की तरफ़ तरफ चली...और वाहा अपना काम करने लगी. फिलल सब कुछ नॉर्मल रुटीन की तरह वो कम कर रही थी.

    अंदर रूम में पड़ा फोन बज रहा था. रहूल बार बार फोन मिला रहा था लेकिन रेस्पोस्से नही मिल रहा था कोई..

    बाहर किचन में...

    कोमल ने लैटर उठाया. गॅस के चुले का नॉब घुमाया. उसमे से गॅस के बाहर आने की आवाज़ आने लगी. उसने लैटर उसे बरनर के पास करा और टिककककककक आवाज़ आईइ.और गॅस जल गयी..

    फाइनल डेस्टिनेशन (हिन्दी अडल्ट वेर्जन)


     

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